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Wednesday, July 14, 2010

सावन



" सावन आया , गीत पवन ने गाये, कली -कली खिल उठी, राग भंवरों ने गाये....................."

Monday, November 23, 2009




" रात का इंतज़ार"

एक शाम मैं घर से निकलकर,
यूँ ही कुछ दूर चली..........
देखती हूँ रात चुपचाप है!

मैंने पूंछा क्या हुआ????

तुम तारों भरी स्वप्न सुंदरी.............
अपनी सुन्दरता के उत्कर्ष पर भी.....
बैठी हो मुरझाई सी,
जैसे कलि कोई कुम्हलाई सी!!

रात 'आह' भरकर बोली........

" मेरी सुन्दरता, ये तारों के गजरे,
जैसे फूल हैं बिन भंवरे,
मैं ख़ुद को ही बहलाती हूँ,
पलकों पर ख्वाब सजाती हूँ!!!


कोई जो मुझको निहारे,
बिखर जाते हैं मेरे गजरों के तारे !!!

Sunday, November 22, 2009



"रात के जगमगाते जुगनू आसमान पर छाये हैं!
चाँद तारे धरती पर उतर आए हैं!!
खामोश रात खड़ी है अकेली....................
उसके मन में सैकड़ों चाहें हैं....................!!!!! "

Tuesday, November 3, 2009

"तितली की उड़ान"




" होती है तमन्ना तितली की यही,
उड़ने
का उसको आधार मिले,
जो भी देखे सपना वो,
कुछ
हद तक तो साकार मिले,

हसरत को दिल में रखकर,
वो
अपने पंख फैलाती है,
हर फूल की मासूमियत को ,
महसूस
वो करके आती है!!

बेचारी तितली नहीं जानती,
जीवन
उसका छोटा है,
इस
दुनिया में मासूमियत नही,
लोगों
का मन् ही खोटा है!

जब
किसी दिन वो अपने ,
रंग
बिरंगे पर फैलाएगी,
किसी के हाथों से मसल दी जायेगी!!!

खूबसूरत
अरमानों की कमी नही है दुनिया में,
अंधेरे
के शमशानों की भी कमी नही है दुनिया में!

जीवन
है छोटा तो क्या हुआ??
हसरतें
हैं बाकी तो -
आकाश
है विस्तृत, तितली की उड़ान का कोई अंत नही,
उड़ती
वो उड़ती ही जायेगी,किसी के हाथों में नहीं आएगी.....................

Sunday, October 4, 2009

!! Dushera in Bangalore !!!

Dushehra or Duseraa, whatever we call it.... same festivity has a difference in celebration styles when it comes to India. I recently saw and felt "dussera" and its celebrations in bangalore.Its quite different from what i have seen since childhood.
belonging from north India, i am used to eating Channa Dal , chawal with dahi vadaas on the occasion accompanied by paan in the night when many people go to each other's home and greet them. In Bangalore, however they offer prayers to God and offer bali of cock or goat to the goddess Kali for good blessing. That flesh is cooked at home and eaten as 'prashaad". they also offer langars where local people have rice, saambhar etc. This dushehra reminded me of the cultural diversity of the India....and brought me back to the memory lane once again........when i was a kid.burning crackers and eating sweets with my childhood friends.:)

Thursday, September 24, 2009

छोटी फिल्में बड़ा बाज़ार


पिछले कई दशकों से हमारे सिने प्रेमी बड़े बजट की बड़े सितारों वाली फिल्मों को बड़े परदे पर देखकर अपनी जेबों में बड़ा सा छेद कर लेते थे, और संतुष्टि के नाम पर मिलता कुछ ख़ास नही था। बार बार का वही दोहराव और उबाउपन। वही चहेते सितारे और ठुमके लगती हुई हेरोइनेस जिनके हिस्से में अभिनय तो नाम मात्र का ही आता था। पर अब हमारे फ़िल्म जगत में नए निर्देशकों के आने से नई विचारधारा ने जनम लिया है, अब छोटे बजट में ही कई प्रयोगधर्मी फिल्में बन रही हैं और दर्शकों द्वारा पसंद भी की जा रही है। और ये बहुत अच्छे स्तर पर लोगों का मनोरंजन भी कर रही हैं! इन फिल्मों की खासियत है-

१ कसी हुई पटकथा
२ चुस्त संवाद
३ नए चेहरे
४ नए विषय
५.अलग त्रेत्मेंट
६ और ताज़ापन

ऐसी ही फिल्मों में है - दसविदानिया, संकट सिटी, देव डी ...............

ये तो सिर्फ़ कुछ नाम हैं, आज जब बड़े बजट की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुह गिर रही हैं, ये छोटी फिल्में बड़े स्तर पर लोगों द्वारा सराही जा रही हैं! जो की निश्चय ही एक बड़ा बदलाव है!!!

Wednesday, September 23, 2009


!!! मेरी आंखों में सोये सारे ख्वाब जगा दो, मेरा खोया हुआ बचपन फ़िर से लौटा दो!!!!
!!! ज़िन्दगी है खामोश कश्ती की तरह, इसमें भरके रवानगी ज़रा जीने की वजह दो!!!